Poems and Art pieces by Akanchha Choudhary-

Do you know?
I’m savage
I’m raw
Do you know?
I’m the most natural,
I behave artificial
When you become injurious.
Do you know?
No longer of soil,
Yup! No longer of soil
People are now made up of plastic
And I call myself the fantastic
Do you know?
I love everyone,
I don’t like anyone.
I am attached;
I am detached.
I want socialisation;
I need solitude.
Do you know?
I love speaking,
I stopped talking.
I care about you; 
I don’t care about you.
whatever I do
whatever I do 
I do it out of self love.
Who are you to judge?
for me 
it matters my God and then I,
rest just take rest!
उचित अनुचित का भान रहे,
मर्यादाओं के भीतर रहे हर नर – नारी
ताकि भारत का अभिमान रहे
भारत का सम्मान रहे।
यदि मानते हो स्वयं को भारतीय
तो 
सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान रहे।।
 
मैं पाश्चात्यत्ता के विरुद्ध नहीं हूं,
परंतु इतना जान लो पश्चिमी देशों की
उतनी ही नकल करो जितनी अक्ल हो।
सब कुछ अच्छा भी नहीं 
और सब कुछ बुरा भी नहीं
विकास के लिए जितनी आवश्यकता है।
बस उतना ही पश्चिमी रुख लो
बाकी अपनी संस्कृति के विदेशी भी हैं दीवाने
तुम भी इसका ही सुख लो।
जब गहराई में जाओगे तो यही पाओगे
दुनिया में जब-जब अंधेरा भरमाया है
मार्गदर्शन करने आगे आर्यावर्त ही आया है।
 
भूल तुम क्यों जाते हो?
जब हम जाग रहे होते हैं
लोग पश्चिम के सो रहे होते हैं।
बहुत कुछ अपना वह खो रहे होते हैं
हम भागते उनके पीछे हैं
जिन्हें भगा अपने पीछे सकते हैं।।

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Akanchha Choudhary
Writer

UV REPRESENTS